विरासत बचाने निकले DM, 1874 के कुएं से लेकर बाके सिद्ध मंदिर तक पहुंचे
चित्रकूट में पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की पहल तेज हुई।
DM पुलकित गर्ग ने सिद्धपुर के बाके सिद्ध मंदिर और बनाडी के 1874 के ऐतिहासिक कुएं का निरीक्षण किया।
चित्रकूट की विरासत को मिलेगा संरक्षण, DM ने बाके सिद्ध मंदिर और ऐतिहासिक कुएं का किया निरीक्षण
चित्रकूट। जिले की पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कर्वी क्षेत्र के सिद्धपुर स्थित बाके सिद्ध मंदिर और बनाडी गांव में करीब 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कुएं का स्थलीय निरीक्षण कर संरक्षण एवं सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
बाके सिद्ध मंदिर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा
सिद्धपुर स्थित बाके सिद्ध मंदिर पहुंचे जिलाधिकारी ने स्थानीय लोगों से मंदिर की व्यवस्थाओं और समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने मंदिर की टूटी सीढ़ियों की मरम्मत, सुरक्षा रेलिंग तथा दीपावली मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टीन शेड निर्माण की मांग रखी।
डीएम ने मंदिर के पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साड़ा के अधिकारियों को स्थल की पैमाइश कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा, ताकि सीढ़ियों के जीर्णोद्धार और सुरक्षा रेलिंग का कार्य आगे बढ़ाया जा सके।
ग्राम प्रधान श्रीरामकिंकर सिंह को यात्री टीन शेड और क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत ग्राम पंचायत निधि से कराने के निर्देश दिए गए। वन विभाग से संबंधित एनओसी की तकनीकी बाधा दूर करने के लिए ऑनलाइन आवेदन तत्काल कराने को भी कहा गया।
पूजा-अर्चना के साथ प्राचीन शैल चित्रों का अवलोकन
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाके सिद्ध मंदिर में पूजा-अर्चना कर जनपदवासियों की सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसके बाद उन्होंने सिद्धपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन शैल चित्रों का भी अवलोकन किया और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी ली।
1874 के आसपास निर्मित ऐतिहासिक कुएं का होगा संरक्षण
इसके बाद जिलाधिकारी ग्राम बनाडी पहुंचे, जहां उन्होंने वर्ष 1874 के आसपास निर्मित ऐतिहासिक कुएं का निरीक्षण किया। उन्होंने कुएं की वर्तमान स्थिति और आसपास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
डीएम ने खंड विकास अधिकारी कर्वी को कुएं के आसपास इंटरलॉकिंग कार्य कराने तथा साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
“विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी”
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि पूर्वजों से मिली ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इन धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासन की इस पहल से सिद्धपुर-बनाडी क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं पौराणिक धरोहरों के संरक्षण और वहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जगी है।

विरासत बचाने निकले DM, 1874 के कुएं से लेकर बाके सिद्ध मंदिर तक पहुंचे
