बुंदेलखंड को हरा-भरा बनाने का खाका तैयार, पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट कार्य पर चित्रकूट के डॉ. प्रभाकर सिंह सम्मानित
चित्रकूट/झांसी। बुंदेलखंड में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने और क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने को लेकर झांसी स्थित बुंदेलखंड जोन वन मुख्यालय में महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, वृक्षारोपण, कृषि वानिकी (एग्रो फॉरेस्ट्री), प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए बुंदेलखंड के लिए भावी कार्ययोजना पर मंथन किया गया।
कार्यशाला में जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले संस्थानों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में चित्रकूट के विकास पथ सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर सिंह को जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरीतिमा संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
वन मंत्री ने डॉ. प्रभाकर सिंह को किया सम्मानित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन एवं पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ. प्रभाकर सिंह को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
पर्यावरण संरक्षण को बनाना होगा जनआंदोलन
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी के साथ जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा।
उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण के साथ एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इससे किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने बुंदेलखंड में इको-टूरिज्म और पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना था कि प्राकृतिक क्षेत्रों के बेहतर विकास से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
गांव-गांव पहुंचेगा कृषि वानिकी का संदेश
कार्यशाला में ग्राम चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को कृषि वानिकी के प्रति जागरूक और प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए निरंतर अभियान चलाने का आह्वान किया गया।
डॉ. प्रभाकर सिंह बोले—सम्मान पूरी टीम का
सम्मान मिलने के बाद डॉ. प्रभाकर सिंह ने इसे गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि विकास पथ सेवा संस्थान की पूरी टीम द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, हरीतिमा संवर्धन और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का सम्मान है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्थान को भविष्य में और अधिक ऊर्जा, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की प्रेरणा देगा।
डॉ. सिंह के मुताबिक चित्रकूट सहित पूरे बुंदेलखंड में वर्षा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हरीतिमा संवर्धन को केवल पौधरोपण तक सीमित न रखकर इसे जल और मिट्टी संरक्षण से जोड़ना जरूरी है।
पांच समूहों ने तैयार किया समन्वित खाका
कार्यशाला की महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि बुंदेलखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पांच समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह ने अपने क्षेत्रीय अनुभव और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर एक समन्वित खाका तैयार किया।
अब इस खाके को व्यवस्थित कर बुंदेलखंड के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, वृक्षारोपण, एग्रो फॉरेस्ट्री, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, हरित क्षेत्र का विस्तार और जनभागीदारी जैसे विषय प्रमुखता से शामिल होंगे।
जल-जंगल-जमीन को एक साथ बचाने पर जोर
कार्यशाला में विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे जल संकट से प्रभावित क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन को अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
वन विभाग, अन्य सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।
कार्यशाला में देवाशीष जेना, प्रभागीय वनाधिकारी महोबा, पंकज कुमार शुक्ला, प्रभागीय वनाधिकारी बांदा, अरविंद कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी हमीरपुर, प्रदीप सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी उरई, अभिमन्यु सिंह, सर्वोदय सेवा संस्थान चित्रकूट, राजेंद्र निगम, लोकपथ चैरिटेबल ट्रस्ट, देवेंद्र गांधी, समर्थ इंडिया हमीरपुर, संजय सिंह, परमार्थ संस्थान, वासुदेव सिंह, ललितपुर, पीके शुक्ला, लघु सिंचाई विभाग चित्रकूट तथा बलजीत बहादुर सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी चित्रकूट सहित वन विभाग और विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
