मऊ में पत्रकार के खिलाफ क्रॉस FIR से मचा बवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
मूर्ति विवाद की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार ने लगाया धमकी का आरोप, पहले दर्ज कराया था मुकदमा; अब दूसरे पक्ष की तहरीर पर पत्रकार के खिलाफ भी FIR
चित्रकूट। जिले के मऊ थाना क्षेत्र में पत्रकार के खिलाफ दर्ज हुई क्रॉस एफआईआर को लेकर मामला गरमा गया है। पत्रकार रविशंकर गुप्ता के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद जिले के पत्रकारों में नाराजगी है। पत्रकारों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी पक्ष के साथ एकतरफा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, पूरा मामला मऊ थाना क्षेत्र के कोटरा खाम्भा गांव के टिटिहिरिया मजरे का है, जहां हनुमान जी की मूर्ति रखे जाने को लेकर विवाद हुआ था। इसी विवाद की जानकारी सामने आने के बाद एफएम न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकार और यूट्यूबर रविशंकर गुप्ता मौके पर कवरेज करने पहुंचे थे।
पत्रकार का आरोप है कि कवरेज के दौरान एक पक्ष के कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता करते हुए जान से मारने की धमकी दी। आरोप यह भी है कि उन्हें पेट्रोल डालकर जला देने तक की धमकी दी गई। घटना से भयभीत पत्रकार ने मऊ थाने पहुंचकर संबंधित लोगों के खिलाफ तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
इसके बाद कहानी में आया नया मोड़। पत्रकार पक्ष के मुताबिक, दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस को तहरीर दी गई और उसी के आधार पर रविशंकर गुप्ता के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली गई।
यही क्रॉस एफआईआर अब सवालों के घेरे में है। पत्रकारों का आरोप है कि पहले पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, लेकिन पत्रकार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर दिया गया। हालांकि, क्रॉस एफआईआर में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
पत्रकारों में क्यों है नाराजगी?
पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी पत्रकार के खिलाफ शिकायत मिलती है तो कानून के मुताबिक निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के तथ्यों की पड़ताल जरूरी है। उनका आरोप है कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में पुलिस को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि पत्रकारिता के कार्य और व्यक्तिगत विवाद के बीच अंतर स्पष्ट रहे।
अब पत्रकार समुदाय ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मऊ के टिटिहिरिया प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोनों पक्षों के आरोपों और साक्ष्यों की जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
क्या पत्रकार के खिलाफ दर्ज क्रॉस एफआईआर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच का हिस्सा है या फिर पहले से चल रहे विवाद का दूसरा पक्ष? इसका जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल इस मामले ने चित्रकूट में पत्रकारों की सुरक्षा और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज होने वाले मुकदमों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
